Hearing Loss in Hindi – एक सफल मौखिक संप्रेषण, संवाद या बात-चीत करने के लिए बोलना और सुनना दोनों ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया हैं। इनमें से किसी भी प्रक्रिया के न होने पर कोई संप्रेषण अर्थात बात-चीत पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में अगर किसी को हियरिंग लॉस की समस्या हो तो उसे हर तरह के मौखिक संवाद या संप्रेषण में दिक्कत होगी। अन्य शब्दों में कहें तो जिस व्यक्ति को हियरिंग लॉस की समस्या होगी, वो ठीक से सुन नहीं पाएगा। परिणामस्वरूप उस समय हो रहे संवाद को सफल बनाने में कठनाई होगी या वो संवाद अधूरा रह जाएगा। अब बात आती है कि, ये हियरिंग लॉस क्या है? हियरिंग लॉस किस समस्या हो कहते हैं? या हियरिंग लॉस क्या होती है? तो आइए जानते हैं, आखिर हियरिंग लॉस किसे कहते हैं?

क्या होती है हियरिंग लॉस? What is Hearing Loss in Hindi

हियरिंग लॉस उस स्थिति को बोला जाता है, जब कोई व्यक्ति एक या दोनों कान से सुनने में असमर्थ होता है। इस स्थिति को हिन्दी में बहरापन और अंग्रेजी में Hearing Loss कहा जाता है। बहरापन की यह समस्या आमतौर पर व्यक्ति की बढ़ती उम्र के साथ बढ़ती है। “नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑन डीफनेस एंड अदर कम्‍यूनिकेशंस डिसऑर्डर (National Institute on Deafness and Other Communication Disorders) का मानना है, 65 से 74 उम्र के लोगों में लगभग 25 परसेंट लोग हियरिंग लॉस की समस्या से ग्रस्त होते हैं।” हियरिंग लॉस कम सुनाई देने से लेकर बिल्कुल सुनाई न देने की प्रक्रिया है। जो कभी धीरे-धीरे इंसान को बहरा बनाती है तो कभी अचानक से व्यक्ति को बहरा कर देती है।

हियरिंग लॉस या बहरापन के कारण:Causes of Hearing Loss in Hindi

व्यक्ति के बहरे होने या हियरिंग लॉस के कई तरह के कारण होते हैं। जिनकी वजह से उस व्यक्ति को किसी बात को सुनने में कठनाई होती है। तो चलिए बात करते हैं बहरापन के ऐसे ही कुछ कारकों के बारे में।

कोक्लिया में हानि:

कोक्लिया कान के अन्दर मौजूद उस अंग का नाम है, जो व्यक्ति के दिमाग में ध्वनि संकेत (sound signal) पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब व्यक्ति ऐसे वातावरण के अंतर्गत आ जाता है, जहां पर तेज शोर हो तो इससे उसके कोक्लिया को हानि होने लगती है। जिसके कारण इस कोशिका को मस्तिष्क तक साउंड सिंग्नल भेजने में कठनाई होने लगती है। इस स्थिति में व्यक्ति आवाज को कम सुन पाता है। अर्थात उसे बहरापन की दिक्कत होने लगती है।

कान का संक्रमण:

कान की हड्डी बढ़ने, कोई संक्रमण होने या किसी अन्य कारण से कान में क्षति होने से भी ध्वनि सुनने में कठनाई होती है, जो आगे चलकर बहरापन का रूप ले सकती है।

कान के पर्दे की चोट:

कान पर अचानक से कोई तेज दवाब पड़ने, कान में कुछ चाले जाने, किसी नोकदार या अन्य चीज से कान में खुजली करने जैसे कारणों से कई बार कान के पर्दे पर चोट आ जाती है। इसके कारण वह व्यक्ति हियरिंग लॉस का शिकार हो जाता है।

बहरापन के कुछ  अन्य कारण:

  • 1. अत्याधिक शोर वाली जहग पर देर तक रहना
  • 2. उम्र का बढ़ना
  • 3. अनुवांशिक विकार (genetic disorder) 
  • 4. मशीन पर लंबे समय तक काम करना
  • 5. ऑटोस्‍केलोरोसिस और मेनियर डिसीज जैसी बीमारियों से पीड़ित होना
  • 6. ऑटोटॉक्सिस जैसी दवाओं का दुष्प्रभाव
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हियरिंग लॉस या बहरापन के लक्षण:

  • 1. ठीक से सुनाई न देना
  • 2. किसी से एक ही बात को बार-बार बुलवाना
  • 3. तेज शोर में बैचेनी, थकावट या कान में दर्द होना
  • 4. कान में सनसनाहट जैसी आवाज महसूस होना
  • 5. अचानक से कान में घंटी बजने जैसा सुनाई पड़ना
  • 6. कान और सिर में तेज दर्द होना
  • 7. तेज आवाज में टीवी देखना 
  • 8. अचानक से सुनाई न देना आदि
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बहरापन की जांच:

जो लोग हियरिंग लॉस जैसी समस्या से गुजर रहे हैं। वे लोग अपने कान की स्थिति जांचने के लिए चिकित्सक की सलाह पर निम्न जांचे करा सकते हैं।

कानों की जांच:

जो लोग पास की आवाज तक सुनने में असमर्थ रहते हैं। उन्हें सर्वप्रथम अपने कानों की जांच करानी चाहिए। इस जांच में डॉक्टर्स पेशेंट के कान के संक्रमण, कान के मैल और कान की सूजन की जांच करके सटीक परेशानी का पता लगाते हैं।

स्क्रिनींग टेस्ट: 

इसमें डॉक्टर पेशेंट से एक कान को बंद करके, दूसरे कान से सुनने के लिए लिए कहेंगे। इस प्रक्रिया के माध्यम से डॉक्टर पेशेंट की सुनने की शक्ति को मापने का प्रयास करता है।

ओडियोमिटर टेस्ट:

इसमें डाक्टर पेशेंट को दो अलग-अलग प्रक्रिया मेंं बोले गए शब्दों को सुनने के लिए कहता है। इसमें कुछ शब्दों को वह क्लियर बैकग्राउंड में बोलता है और कुछ शब्दों को शौर वाले बैकग्राउंड। इस प्रकार वह पेशेंट के कान की सुनने का क्षमता की जांच करता है।

ट्यूनिंग फोर्क टेस्ट:

इसमें डॉक्टर पेशेंट के कान की आंतरिक जांच करता है और जांच के दौरान यदि उसे कान के पर्दे में चोट या छेद मिलता है तो वो पेशेंट को टिम्पैनोप्लास्टी के लिए कहता है।

हियरिंग लॉस का इलाज:

हर व्यक्ति का बहरापन एक-दूसरे से थोड़ा अलग होता है और उसी पर उनका इलाज निर्भर करता है। डॉक्टर भी हर पेशेंट का उनके हियरिंग लॉस के आधार पर इलाज करता है। क्या होता है बहरापन का इलाज? आइए जानें,

ईयर क्लीनिंग:

इसे बहरापन का प्रथम इलाज के तौर पर देखा जाता है। कई बार कुछ लोग कान में मौजूद मैल के कारण भी ठीक से सुनने में असमर्थ रहते हैं। ऐसे में डॉक्टर उनके कान से मैल निकालकर कान की सफाई करता है। ऐसा करने से पेशेंट की सुनने की क्षमता पर सकारत्मक प्रभाव पड़ता है।

ईयर सर्जरी: 

जिन लोगों के कान में कोई गंभीर चोट या संक्रमण होता है। जिसके कारण वो बहरे हो जाते हैं। ऐसे लोगों का इलाज डॉक्टर्स कान की सर्जरी करके करते हैं।

कान की मशीन या हियरिंग एड्स: 

यदि किसी व्यक्ति के कान में कोई हल्की इंजरी या घाव है। जिसके कारण वह सुनने में असमर्थ हो जाता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर कान की मशीन यूज करने के लिए कहते हैं। कान की इन मशीनों को हियरिंग एड्स भी बोला जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQS)

अगर कान से कम सुनाई दे तो क्या करना चाहिए?

ऐसी स्थिति होने पर बिना देर किए सर्वप्रथम डॉक्टर के पास जाएं और कान की जांच कराएं और उनकी सलाह (advise) को फॉलो करें। इसके अलावा कानों की अच्छी से देखभाल करें, शोर वाले इलाके में जानें से बचें, ईयर फोन का इस्तेमाल करने से बचें, तेज आवाज में गाने न सुनें। 

क्या श्रवण हानि ठीक हो सकती है?

हां, कुछ प्रकार की श्रवण हानियों का इलाज सर्जरी के माध्यम से किया जा सकता है। इन हानियों में कान के पर्दे की असामान्यताएं शामिल हैं।

हियरिंग लॉस को ठीक करने के लिए क्या करना चाहिए?

किसी भी तरह के बहरापन को ठीक करने के लिए सबसे पहले हियरिंग लॉस के कारण का पता लगाना चाहिए। इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर के पास जाकर हियरिंग लॉस की जांच करानी चाहिए। इसी के आधार पर डॉक्टर बहरापन का इलाज शुरू करेंगे।

क्या एक कान में ज्यादा सुनना नॉर्मल है?

नहीं, एक कान से ज्यादा सुनना और दूसरे से कम सुनना कोई सामान्य बात नहीं होती। इसलिए जब भी आप इस तरह की स्थिति को पहचान पाएं तो आपको तुरंत जांच के लिए डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

बहरापन का सबसे अच्छा इलाज क्या है?

बहरापन का सबसे अच्छा इलाज उसके कारण और प्रकार पर निर्भर करता है। कुछ लोगों को कान की सफाई करने से ही ठीक से सुनने लग जाता है। वहीं, कुछ लोगों को ठीक से सुनने के लिए कान की मशीन की आवश्यकता पड़ती है तो कुछ को कान की सर्जरी तक करानी पड़ती है।

कान के पर्दे का इलाज कैसे किया जाता है?

आमतौर पर कान के पर्दे खुद ही कुछ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। पर कई बार कान के पर्दे में हल्की चोट लगने पर उसे डॉक्टर की सलाहानुसार दवाओ से ठीक किया जा सकता है। वहीं, जब कान में कोई गंभीर चोट या संक्रमण होता है तब डॉक्टर द्वारा कान की सर्जरी की जाती है।

 

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